छह साल से अंधेरे में लोटान मोहल्ला, खंभे और तार लगे लेकिन बिजली नहीं; ग्रामीणों में नाराजगी
धरमजयगढ़। विकासखंड धरमजयगढ़ के ग्राम पंचायत बकालो अंतर्गत लोटान मोहल्ला में विद्युत सुविधा का इंतजार कर रहे ग्रामीणों का सब्र अब टूटने लगा है। वर्ष 2020 में शुरू किया गया विद्युत लाइन विस्तार कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है। बिजली के खंभे गाड़ दिए गए, तार भी खींच दिए गए, लेकिन विभागीय अड़चनों के कारण करीब छह वर्षों बाद भी गांव के 22 से 25 परिवार अंधेरे में जीवन बिताने को मजबूर हैं।
ग्रामीणों के अनुसार विद्युत विभाग ने वर्षों पहले लाइन विस्तार का कार्य शुरू कर दिया था, लेकिन वन विभाग की अनापत्ति (एनओसी) से जुड़े विवाद के चलते काम बीच में ही रुक गया। इसके बाद से न तो बिजली आपूर्ति शुरू हो सकी और न ही समस्या का कोई स्थायी समाधान निकल पाया।
हाल ही में लोटान मोहल्ले के ग्रामीण अपनी समस्या लेकर एक बार फिर विद्युत उपकेंद्र धरमजयगढ़ पहुंचे और अधिकारियों से बिजली आपूर्ति शुरू कराने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों ने उन्हें वन विभाग से एनओसी लाने की बात कहकर वापस भेज दिया।
इस दौरान ग्राम पंचायत बकालो के सरपंच उमाशंकर राठिया भी ग्रामीणों के साथ मौजूद रहे। उन्होंने अधिकारियों के समक्ष ग्रामीणों की समस्या उठाते हुए कहा कि जब खंभे और तार पहले ही लगाए जा चुके हैं, तब केवल विभागीय प्रक्रियाओं और समन्वय की कमी के कारण ग्रामीणों को बिजली से वंचित रखना उचित नहीं है। उन्होंने जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई कर विद्युत आपूर्ति शुरू कराने की मांग की।
सरपंच ने कहा कि विकास का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होगा जब अंतिम व्यक्ति तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचें। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों के साथ उच्च अधिकारियों के समक्ष इस मुद्दे को और गंभीरता से उठाया जाएगा।
विद्युत विभाग से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने बोरो रेंज के वन परिक्षेत्र अधिकारी को भी आवेदन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीण दुर्योधन यादव ने बताया कि बिजली नहीं होने के कारण बच्चे आज भी लालटेन और ढिबरी की रोशनी में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। डिजिटल युग में भी गांव के लोग बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर रायगढ़ कलेक्टर से भी दूरभाष पर चर्चा की है। ग्रामीणों के अनुसार कलेक्टर ने मामले में आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब गांववासियों की उम्मीदें जिला प्रशासन पर टिकी हुई हैं।
बड़ा सवाल
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि वर्ष 2020 में विद्युत लाइन विस्तार के लिए खंभे और तार लगाए गए थे, तो उस समय वन विभाग की अनापत्ति (एनओसी) क्यों नहीं ली गई? यदि एनओसी आवश्यक थी, तो कार्य शुरू करने से पहले विभागों के बीच समन्वय क्यों नहीं किया गया? आखिर छह वर्षों से ग्रामीणों को बिजली सुविधा से वंचित रखने की जिम्मेदारी किसकी है?
लोटान मोहल्ले के ग्रामीणों का कहना है कि विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी माना जाएगा जब उनका फायदा समय पर अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। फिलहाल गांव के लोग बिजली की रोशनी का इंतजार कर रहे हैं।



